सपने वो नहीं है जो आप नींद में देखे, सपने वो है जो आपको नींद ही नहीं आने दे।– अब्दुल कलाम
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Sunday, October 31, 2021

वल्लभ भाई पटेल

वल्लभभाई झावेरभाई पटेल (३१ अक्टूबर १८७५ – १५ दिसंबर १९५०), जो सरदार पटेल के नाम से लोकप्रिय थे, एक भारतीय राजनीतिज्ञ थे। उन्होंने भारत के पहले उप-प्रधानमंत्री के रूप में कार्य किया। वे एक भारतीय अधिवक्ता और राजनेता थे, जो भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता और भारतीय गणराज्य के संस्थापक पिता थे जिन्होंने स्वतंत्रता के लिए देश के संघर्ष में अग्रणी भूमिका निभाई और एक एकीकृत, स्वतंत्र राष्ट्र में अपने एकीकरण का मार्गदर्शन किया। भारत और अन्य जगहों पर, उन्हें अक्सर हिंदी, उर्दू और फ़ारसी में सरदार कहा जाता था, जिसका अर्थ है "प्रमुख"। उन्होंने भारत के राजनीतिक एकीकरण और 1947 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान गृह मंत्री के रूप में कार्य किया।

Monday, August 16, 2021

सुभद्रा कुमारी चौहान (१६ अगस्त १९०४-१५ फरवरी १९४८हिन्दी की सुप्रसिद्ध कवयित्री और लेखिका थीं। उनके दो कविता संग्रह तथा तीन कथा संग्रह प्रकाशित हुए पर उनकी प्रसिद्धि झाँसी की रानी (कविता) के कारण है। ये राष्ट्रीय चेतना की एक सजग कवयित्री रही हैं, किन्तु इन्होंने स्वाधीनता संग्राम में अनेक बार जेल यातनाएँ सहने के पश्चात अपनी अनुभूतियों को कहानी में भी व्यक्त किया। वातावरण चित्रण-प्रधान शैली की भाषा सरल तथा काव्यात्मक है, इस कारण इनकी रचना की सादगी हृदयग्राही है।

Happy Independence Day

Saturday, July 31, 2021

Munshi Premchand Birth Anniversary 2021

 

नाम – धनपत राय श्रीवास्तव उर्फ़ नवाब राय उर्फ़ मुंशी प्रेमचंद
पिता का नाम – अजीब राय
माता का नाम – आनंदी देवी
पत्नी – शिवरानी देवी
व्यवसाय – अध्यापक, लेखक, पत्रकार
जन्म स्थान – लमही, वाराणसी, उत्तर प्रदेश, भारत
जन्म तारीख – 31 जुलाई 1880
अवधि/काल – आधुनिक काल
उल्लेखनीय कार्य – गोदान, कर्मभूमि, रंगभूमि, सेवासदन, निर्मला और मानसरोवर
मृत्यु – 8 अक्टूबर, 1936 वाराणसी, उत्तर प्रदेश, भारत

Saturday, May 1, 2021

1 मई: मजदूर दिवस के अलावा और क्या खास


 एक मई का दिन इतिहास में मजदूर दिवस के तौर पर दर्ज है। दुनिया में मजदूर दिवस मनाने का चलन करीब 132 साल पुराना है। मजदूरों ने काम के घंटे तय करने की मांग को लेकर 1877 में आंदोलन शुरू किया, इस दौरान यह दुनिया के विभिन्न देशों में फैलने लगा। एक मई 1886 को पूरे अमेरिका के लाखों मज़दूरों ने एक साथ हड़ताल शुरू की। इसमें 11,000 फ़ैक्टरियों के कम से कम तीन लाख अस्सी हज़ार मज़दूर शामिल हुए और वहीं से एक मई को मजदूर दिवस के रूप में मनाने की शुरुआत हुई। देश दुनिया के इतिहास में एक मई की तारीख पर दर्ज अन्य महत्वपूर्ण घटनाओं का सिलसिलेवार ब्योरा इस प्रकार है...

1886: अमेरिका के शिकागो में कामगारों के लिए काम के घंटे तय करने को लेकर हड़ताल, मजदूर दिवस मनाने की शुरुआत।

1897: स्वामी विवेकानंद ने रामकृष्ण मिशन की स्थापना की।

1908: प्रफुल्ल चाकी ने मुजफ्फरपुर बम कांड को अंजाम देने के बाद खुद को गोली मारी।

1914: कार निर्माता फोर्ड वह पहली कंपनी बनी जिसने अपने कर्मचारियों के लिए आठ घंटे काम करने का नियम लागू किया।

1923: भारत में मई दिवस मनाने की शुरुआत।

1956: जोनसा साल्क द्वारा विकसित पोलियो वैक्सीन जनता के लिए उपलब्ध कराई गई। ॉ

1960: महाराष्ट्र और गुजरात अलग अलग राज्य बने।

1972: देश की कोयला खदानों का राष्ट्रीयकरण।

2009: स्वीडन ने समलैंगिक विवाह को मंजूरी दी।

2011: अमेरिका पर 2001 के हमले के मास्टरमाइंड ओसामा बिन लादेन के पाकिस्तान के ऐबटाबाद में मारे जाने की पुष्टि।

Wednesday, April 14, 2021

Ambedker Jayanti

भीमराव रामजी आम्बेडकर[a] (14 अप्रैल1891 – 6 दिसंबर1956), डॉ॰ बाबासाहब आम्बेडकर नाम से लोकप्रिय, भारतीय बहुज्ञविधिवेत्ताअर्थशास्त्रीराजनीतिज्ञ, और समाजसुधारक थे।[1] उन्होंने दलित बौद्ध आन्दोलन को प्रेरित किया और अछूतों (दलितों) से सामाजिक भेदभाव के विरुद्ध अभियान चलाया था। श्रमिकों, किसानों और महिलाओं के अधिकारों का समर्थन भी किया था।[2] वे स्वतंत्र भारत के प्रथम विधि एवं न्याय मन्त्रीभारतीय संविधान के जनक एवं भारत गणराज्य के निर्माताओं में से एक थे।


Tuesday, March 23, 2021

शहीदी दिवस 23 मार्च


 शहीद दिवस 2021: जानें 23 मार्च को ही क्यों मनाते हैं शहीद दिवस

भगत सिंह केवल 23 साल के थे जब उन्हें फांसी दी गई थी लेकिन उनके क्रांतिकारी विचार बहुत व्यापक थे. आजादी की लड़ाई से लेकर आजतक हर रैली, आंदोलन और प्रदर्शनों में बोले जाने वाला नारा इंकलाब जिंदाबाद पहली बार भगत सिंह ने ही बोला था.

भारत में शहीद दिवस (Martyrs' Day) 23 मार्च को मनाया जाता है. अंग्रेज़ हुकूमत ने 23 मार्च 1931 की मध्यरात्रि को भारत के तीन सपूतों- भगतसिंह, सुखदेव और राजगुरु को फाँसी पर लटका दिया था. इस बलिदान को याद करने के लिए इस दिन को (23 मार्च) देश भर में शहीद दिवस के रूप में मनाया जाता है.

भगत सिंह केवल 23 साल के थे जब उन्हें फांसी दी गई थी लेकिन उनके क्रांतिकारी विचार बहुत व्यापक थे. आजादी की लड़ाई से लेकर आजतक हर रैली, आंदोलन और प्रदर्शनों में बोले जाने वाला नारा इंकलाब जिंदाबाद पहली बार भगत सिंह ने ही बोला था.

भगत सिंह मानते थे कि व्यक्ति को दबाकर उसके विचार नहीं दबाए जा सकते हैं. तीनों क्रांतिकारियों की इस शहादत को आज पूरा देश याद कर रहा है. ये तीनों ही भारत के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं. शहीद दिवस के अवसर पर स्कूल-कॉलेज और दफ्तरों में वाद-विवाद, भाषण, कविता-पाठ और निबंध प्रतियोगिता जैसे कार्यक्रमों का आयोजन होता है.

शहीद दिवस 23 मार्च को ही क्यों मनाया जाता है?

अंग्रेजी हुकूमत ने भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को 23 मार्च को ही फांसी पर लटका दिया गया था. ये तीनों ही भारत के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं. भारत के इन नवयुवकों ने महात्मा गांधी से अलग रास्ता अपनाया था लेकिन यह देश के कल्याण के लिए था. इतनी कम उम्र में इस बहादुरी के साथ देश के लिए प्राण न्योछावर करने वाले इन वीर सपूतों को श्रद्धांजलि देने हेतु ही 23 मार्च को शहीद दिवस मनाया जाता है।

शहीद दिवस कैसे मनाया जाता है?

पूरा देश इस मौके पर शहीदों की कुर्बानी को याद करता है और उन्हें नमन करता है. देश के गणमान्य लोग एक साथ इकट्ठा होकर शहीदों की प्रतिमाओं पर फूल चढ़ाते हैं. वहीं, देश के सशस्त्र बल के जवान शहीदों को याद में सलामी देते हैं. इसके अतिरिक्त, स्कूल-कॉलेज में भी इस उपलक्ष्य में वाद-विवाद, भाषण, कविता-पाठ एवं निबंध प्रतियोगिता जैसे कार्यक्रमों का आयोजन होता है.।

इस दिन का महत्व

शहीद दिवस को मनाकर हम न केवल शहीदों को श्रद्धांजलि देते हैं बल्कि आज की पीढ़ी को उन शहीदों के जीवन और बलिदानों से परिचित भी कराते हैं. भगत सिंह ने देश की आजादी के लिए जिस साहस के साथ शक्तिशाली ब्रिटिश सरकार का मुकाबला किया, वह युवकों के लिए हमेशा ही एक बहुत बड़ा आदर्श बना रहेगा.

Sunday, March 21, 2021

विश्व गौरैया दिवस 20 मार्च


 ✅ विश्व गौरैया दिवस : 𝚆𝙾𝚁𝙻𝙳 𝚂𝙿𝙰𝚁𝚁𝙾𝚆 𝙳𝙰𝚈 🐦

आज विश्व गौरैया दिवस है। यह हर साल 20 मार्च को मनाया जाता है। गौरैया के प्रति जागरुकता बढ़ाने के लिए साल 2010 में इस दिवस को मनाने की शुरुआत की गई थी। पिछले कुछ समय से गौरैया की संख्या में काफी कमी आई है।

विश्व गौरैया दिवस (World Sparrow Day) हर साल 20 मार्च को मनाया जाता है। विश्व के कई देशों में गौरैया पाई जाती है। यह दिवस लोगों में गौरेया के प्रति जागरुकता बढ़ाने और उसके संरक्षण के लिए मनाया जाता है। बढ़ते प्रदूषण सहित कई कारणों से गौरैया की संख्या में काफी कमी आई है और इनके अस्तित्व पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।

📌 जानिये भारत में गौरेया की क्या है स्थिति :

प्रत्येक वर्ष 20 मार्च 2020 को विश्व गौरैया दिवस मनाया जाता है। इस पक्षी के बारे में जागरूकता बढ़ाने और इसके संरक्षण के लिए विश्व गौरैया दिवस मनाया जाता है। गौरैया भारत में पाया जाने वाला एक सामान्य पक्षी है लेकिन इसे शहरी क्षेत्रों में विलुप्त होने के कगार पर पहुँचा दिया गया है।

 "द नेचर फॉर सोसाइटी ऑफ इंडियन एनवायरनमेंट" के संयोजक मोहम्मद दिलावर ने गौरेया की जनसंख्या में तेजी से गिरावट को देखते हुए यह पहल शुरू की। पहला विश्व गौरैया दिवस 2010 में दुनिया के विभिन्न हिस्सों में मनाया गया था।

रॉयल सोसाइटी ऑफ लंदन की 2018 की रिपोर्ट के अनुसार, मनुष्यों और गौरैया के बीच 11,000 साल पुराना संबंध है। अध्ययन में कहा गया है कि तीन अलग-अलग प्रजातियों - कुत्तों, घरेलू गौरैया और मनुष्यों में कृषि के माध्यम से समान अनुकूलन शुरू हुआ था।

⌛️ विश्व गौरैया दिवस का इतिहास :

विश्व गौरैया दिवस, नेचर फॉरएवर सोसाइटी ऑफ इंडिया के साथ-साथ फ्रांस की इकोसेज एक्शन फाउंडेशन की शुरू की गई एक पहल है। सोसाइटी की शुरुआत फेमस पर्यावरणविद् मोहम्मद दिलावर ने की थी। उन्हें 2008 में टाइम मैगजीन ने "हीरोज ऑफ एनवायरमेंट" में शामिल किया गया था। साल 2010 में पहली बार 20 मार्च को विश्व गौरैया दिवस मनाया गया। इसके बाद हर साल 20 मार्च को यह दिवस मनाया जाता है। इस दिवस पर गौरैया के संरक्षण के लिए काम करने वाले लोगों को गौरैया पुरस्कार से सम्मानित भी किया जाता है।

▪️ गौरैया से जुडे कुछ रोचक तथ्य :

गौरैया का वैज्ञानिक नाम पासर डोमेस्टिकस और सामान्य नाम हाउस स्पैरो है। इसकी ऊंचाई 16 सेंटीमीटर और विंगस्पैन 21 सेंटीमीटर होते हैं। गौरैया का वजन 25 से 40 ग्राम होता है। गौरैया अनाज और कीड़े खाकर जीवनयापन करती है। शहरों की तुलना में गांवों में रहना इसे ज्यादा पसंद है।

▪️ कम हो रही है गौरैया की संख्या :

गौरैया की संख्या लगातार कम होती जा रही है. एस स्टडी के अनुसार इसकी संख्या में 60 फीसदी तक कमी आई है। विश्व गौरैया दिवस मनाने का एक उद्देशय यह भी है कि हमारे युवा और प्रकृति के प्रति उत्साही लोगों को गौरैया से प्रेम करने और उनकी देखभाल करने के लिए प्रोत्साहित किया जाए।

▪️ भारत में गौरैया की स्थिति :

रॉयल सोसाइटी फॉर द प्रोटेक्शन ऑफ बर्ड्स के एक हालिया सर्वेक्षण के अनुसार, पिछले 40 वर्षों में अन्य पक्षियों की संख्या में वृद्धि हुई है, लेकिन भारत में गौरैया की संख्या में 60% की कमी आई है। दुनिया भर में गौरैया की 26 प्रजातियां हैं, जबकि उनमें से 5 भारत में पाई जाती हैं।वर्ष 2015 की पक्षी जनगणना के अनुसार, लखनऊ में केवल 5692 और पंजाब के कुछ क्षेत्रों में लगभग 775 गौरैया थीं। वर्ष 2017 में, तिरुवनंतपुरम में केवल 29 गौरैया की पहचान की गई थी।

 भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के एक सर्वेक्षण में पाया गया कि आंध्र प्रदेश में इसकी संख्या में 80% की कमी आई है। केरल, गुजरात और राजस्थान जैसे राज्यों में 20% तक की गिरावट देखी गई है।

 ▪️ पृष्ठभूमि :

विश्व गौरैया दिवस पहली बार 2010 में नेचर फॉरएवर सोसायटी के अध्यक्ष मोहम्मद दिलावर के प्रयासों से मनाया गया था। तब से, यह दिवस प्रत्येक वर्ष 20 मार्च को मनाया जाता है। इसका उद्देश्य गौरैया के संरक्षण के प्रति लोगों में जागरूकता लाना है।

▪ गौरैया का महत्व :

 पर्यावरण संतुलन में गौरैया महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। गौरैया अपने बच्चों को अल्फ़ा और कैटवॉर्म नामक कीड़े खिलाती है। ये कीड़े फसलों के लिए बेहद खतरनाक होते हैं। वे फसलों की पत्तियों को मारकर नष्ट कर देते हैं। इसके अलावा, गौरैया मानसून के मौसम में दिखाई देने वाले कीड़े भी खाती है।

Sunday, February 28, 2021

National Science Day

 


February 28 is observed as National Science Day to mark the anniversary of India’s greatest discovery- ‘Raman effect’ and to recognise the contributions of scientists towards the development of the nation. On this day in 1928, India’s prominent scientist CV Raman invented the ‘Raman Effect,’ for which he won the Nobel prize in 1930. Today, the government of India felicitates scientists whose contribution played an eminent role in the field of science and innovation.

Saturday, January 23, 2021

Prakram Diwas (Subhash Chandra Bose Jayanti )

 

जन्म23 जनवरी 1897
कटकबंगाल प्रेसीडेंसी का ओड़िसा डिवीजनब्रिटिश भारत
राष्ट्रीयताभारतीय
शिक्षाबी०ए० (आनर्स)
शिक्षा प्राप्त कीकलकत्ता विश्वविद्यालय
पदवीअध्यक्ष (भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस)(1938)
सुप्रीम कमाण्डर आज़ाद हिन्द फ़ौज
प्रसिद्धि कारणभारतीय स्वतन्त्रता संग्राम के अग्रणी सेनानी तथा सबसे बड़े नेता
राजनैतिक पार्टीभारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस 1921–1940,
फॉरवर्ड ब्लॉक 1939–1940
जीवनसाथीएमिली शेंकल
(1937 में विवाह किन्तु जनता को 1993 में पता चला)
बच्चेअनिता बोस फाफ
संबंधीशरतचन्द्र बोस भाई
शिशिर कुमार बोस भतीजा

Friday, January 15, 2021

भारतीय सेना दिवस

 15 जनवरी

 73वां भारतीय सेना दिवस :

भारतीय सेना का आदर्श वाक्य "स्वयं से पहले सेवा" है।

• प्रत्येक वर्ष 15 जनवरी बतौर सेना दिवस (Army Day)  तत्कालीन लेफ्टिनेंट जनरल के.एम. करियप्पा (भारतीय सेना के प्रथम भारतीय कमांडर इन चीफ और बाद में पहले फील्ड मार्शल) जिन्होंने इसी दिन भारत के अंतिम ब्रिटिश कमांडर-इन-चीफ जनरल फ्रांसिस बुचर  (General Sir Francis Butcher)  की जगह ली थी, के सम्मान में मनाया जाता है। 

• तत्कालीन भारतीय सेना में उस समय लगभग 2 लाख सैनिक थे जब करियप्पा ने वर्ष 1947 में भारत-पाक के बीच हुए युद्ध में भारतीय सेना की कमान संभाली थी। 

• भारतीय सेना का गठन वर्ष 1776 में ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा कलकत्ता (वर्तमान कोलकाता) में हुआ था।

सेना दिवस मनाना :

• यह दिन थल सेना की वीरता, अदम्य साहस, शौर्य और उसकी कुर्बानी की याद करता है। 

• राजधानी दिल्ली में सेना कमान मुख्यालय के साथ देश के अन्य हिस्सों में सैन्य परेड और शक्ति प्रदर्शन के अन्य कार्यक्रमों का आयोजन के रूप में इस दिन को मनाया जाता है। 

• इस मौके पर सेना के कई दस्ते और रेजिमेंट मुख्य रूप से दिल्ली छावनी स्थित करियप्पा परेड मैदान में हिस्सा लेते हैं तथा विभिन्न झांकियां निकालने के साथ ही इस अवसर पर लड़ाकू प्रदर्शन भी परेड का हिस्सा होते हैं। 

• यह दिन थल सेना की वीरता, अदम्य साहस, शौर्य और उसकी कुर्बानी की याद करता है। 

• परमवीर चक्र और अशोक चक्र पुरस्कार विजेताओं की उपस्थिति में इस दिन वीरता पुरस्कार और सेना पदक प्रदान किए जाते हैं। 

• पिछले सेना दिवस वर्ष 2020 में कैप्टन तानिया शेरगिल आर्मी डे परेड की कमान संभालने वाली पहली महिला अधिकारी बनीं थी।

Tuesday, January 12, 2021

National Youth Day 2021


 The world celebrates the great monk Swami Vivekananda’s birth anniversary on January 12 who worked for the betterment of society. Born on January 12, 1863, in Kolkata, swami was a chief disciple of Sri Ramakrishna Paramhansa and played a very important in the revival of Hinduism in India. Swami Vivekananda’s original name was Narendranath Datta.

It was way back in 1984 that the government of India declared January 12 as National Youth Day to commemorate the birthday of Swami Vivekananda, who was a social reformer, philosopher, and great thinker. And since then, the day is celebrated with great enthusiasm. Schools and colleges across the country celebrate National Youth Day with speeches, music, seminars, presentations, and competitions.