सपने वो नहीं है जो आप नींद में देखे, सपने वो है जो आपको नींद ही नहीं आने दे।– अब्दुल कलाम
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Friday, October 30, 2020

सरदार वल्लभ भाई पटेल


 

पद बहाल
15 अगस्त 1947 – 15 दिसम्बर 1950
प्रधानमंत्रीजवाहरलाल नेहरु
पूर्वा धिकारीपद सृजन
उत्तरा धिकारीमोरारजी देसाई

पद बहाल
15 अगस्त 1947 – 15 दिसम्बर 1950
प्रधानमंत्रीजवाहरलाल नेहरु
पूर्वा धिकारीपद सृजन
उत्तरा धिकारीचक्रवर्ती राजगोपालाचारी

जन्म31 अक्टूबर 1875
नडियादबंबई प्रेसीडेंसीब्रिटिश भारत
मृत्यु15 दिसम्बर 1950 (उम्र 75)
बॉम्बेबॉम्बे राज्यभारत
राष्ट्रीयताभारतीय
राजनीतिक दलभारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
बच्चेमणिबेन पटेलदह्याभाई पटेल
शैक्षिक सम्बद्धतामिडल टेम्पल
पेशावकालत, राजनीति

सतर्कता जागरूक सप्ताह

 

सतर्कता जागरूकता सप्ताह के महत्वपूर्ण बिंदु :
:white_check_mark:क्यों मनाया जाता है ?
:arrow_right:प्रत्येक वर्ष सरदार वल्लभभाई पटेल के जन्म दिवस 31 अक्टूबर को ध्यान में रखकर सप्ताह के रूप में मनाया जाता है।
:arrow_right:इस साल 2020 में, सतर्कता जागरूकता सप्ताह 27 अक्टूबर से 2 नवंबर, 2020 तक “सतर्क भारत, समृद्ध भारत - Satark Bharat, Samriddh Bharat (Vigilant India, Prosperous India)” विषय के साथ मनाया जा रहा है।
:arrow_right:वेबसाइट पर अर्थगर्भित विषयों को डालने तथा प्रस्तावित विषय पर मुख्य सतर्कता अधिकारियों की राय प्राप्त करने के बाद इस वर्ष इस विषय को चुना गया है।
:arrow_right:केन्द्रीय सतर्कता आयोग 27 अक्टूबर से 2 नवंबर, 2020 तक सतर्कता जागरूकता सप्ताह का अनुपालन कर रहा है।
:arrow_right:नागरिक भागीदारी के माध्यम से सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी तथा सत्यनिष्ठा को बढ़ावा देने के लिए, यह जागरूकता सप्ताह हमारी प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है ।
:arrow_right:आयोग का मानना है कि राष्ट्र की प्रगति में भ्रष्टाचार एक मुख्य बाधा है । समाज के सभी वर्गों को हमारे राष्ट्रीय जीवन में ईमानदारी बनाए रखने के लिए सतर्क रहने की आवश्यकता है।

Monday, October 26, 2020

*आज का प्रेरक प्रसंग*

!! असली शिक्षा !!*

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एक बड़ी सी गाड़ी आकर बाजार में रूकी, कार में ही मोबाईल से बातें करते हुए महिला ने अपनी बच्ची से कहा, जा उस बुढिया से पूछ सब्जी कैंसे दी, बच्ची कार से उतरतें ही- अरें बुढिया ! यें सब्जी कैंसे दी?

40 रूपयें किलो, बेबी जी...

सब्जी लेते ही उस बच्ची ने सौ रूपयें का नोट उस सब्जी वाली को फेंक कर दिया और आकर कार पर बैठ गयी, कार जाने लगी तभी अचानक किसी ने कार के सीसे पर दस्तक दी, एक छोटी सी बच्ची जो हाथ में 60 रूपयें कार में बैठी उस औरत को देते हुए, बोलती हैं आंटी जी यें आपके सब्जी के बचें 60 रूपयें हैं, आपकी बेटी भूल आयी हैं। कार में बैठी औरत ने कहा तुम रख लों, उस बच्ची ने बड़ी ही मिठी और सभ्यता से कहा- नहीं आंटी जी हमारें जितने पैंसे बनते थें हमने ले लियें, हम इसे नहीं रख सकतें, मैं आपकी आभारी हूं, आप हमारी दुकान पर आए और आशा करती हूं कि सब्जी आपको अच्छी लगें, जिससे आप हमारें ही दुकान पर हमेशा आए। उस लड़की ने हाथ जोड़े और अपनी दुकान लौट गयी...

कार में बैठी महिला उस लड़की से बहुत प्रभावित हुई और कार से उतर कर फिर सब्जी की दुकान पर जाने लगी, जैसें ही वहाँ पास गयी, सब्जी वाली अपनी बच्ची को पूछते हुयें, तुमने तमीज से बात की ना, कोई शिकायत का मौका तो नहीं दिया ना..?

बच्ची ने कहा, हाँ माँ मुझे आपकी सिखाई हर बात याद है, कभी किसी बड़े का अपमान मत करो, उनसे सभ्यता से बात करो, उनकी कद्र करो, क्यूंकि बड़े-बुजर्ग बड़े ही होते हैं, मुझे आपकी सारी बात याद है और मैं सदैव इन बातों का स्मरण रखूंगी। बच्ची ने फिर कहा, अच्छा माँ अब मैं स्कूल चलती हूं, शाम में स्कूल से छुट्टी होते ही, दुकान पर आ जाऊंगी...

कार वाली महिला शर्म से पानी पानी थी, क्यूंकि एक सब्जी वाली अपनी बेटी को इंसानियत और बड़ों से बात करने के शिष्टाचार का पाठ सीखा रही थी और वह महिला अपनी बेटी को छोटा-बड़ा, ऊंच-नीच का मन में बीज बो रही थी..!!

शिक्षा:-

सबसे अच्छा तो वो कहलाता है जो आसमान पर भी रहता है और जमींन से भी जुड़ा रहता है। बस इंसानियत, भाईचारें, सभ्यता, आचरण, वाणी में मिठास, सब की इज्जत करने की सीख दीजिए अपने बच्चों को, क्यूंकि अब बस यहीं पढ़ाई है जो आने वाले समय में बहुत ही ज्यादा मुश्किल होगी इसे पढ़ने, इसे याद रखने, इसे ग्रहण करने में और जीवन को उपयोगी बनानें में !!

*सदैव प्रसन्न रहिये।*

*जो प्राप्त है, पर्याप्त है।

Sunday, October 25, 2020

*आज का प्रेरक प्रसंग*

*स्कूल टीचर ने बोर्ड पर लिखा:*

9×1=9

9×2=18

9×3=27

9×4=36

9×5=45

9×6=54

9×7=63

9×8=72

9×9=81

9×10=89

*लिखने के बाद बच्चों को देखा तो बच्चे शिक्षक पर हंस रहे थे, क्योंकि आखिरी लाइन गलत थी।*

*फिर शिक्षक ने कहा:*

*"मैंने आखिरी लाइन किसी उद्देश्य से गलत लिखी है क्यूंकि मैं तुम सभी को कुछ अत्यंत महत्वपूर्ण सिखाना चाहता हूं।*

*दुनिया तुम्हारे साथ ऐसा ही व्यवहार करेगी..!*

*तुम देख सकते हो कि मैंने ऊपर 9 बार सही लिखा है पर किसी ने भी मेरी तारीफ नहीं की..??*

*पर मेरी सिर्फ एक ही गलती पर तुम लोग हंसे और मुझे क्रिटिसाइज भी किया।"*

*तो यही नसीहत है :*

*कि दुनिया कभी आपके लाख अच्छे कार्यों को एप्रीशिएट (appreciate) करे या न करे , परन्तु आपके द्वारा की गई एक गलती को क्रिटिसाइज (criticize) जरूर करेगी।*

*ये एक कटु सत्य है*

*स्वस्थ एवं सुरक्षित रहें।*



        

Monday, October 5, 2020

*आज का प्रेरक प्रसंग*

   *!! महिला के शुभ कदम !!*

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एक आदमी ने दुकानदार से पूछा: केले और सेव फल क्या भाव लगाऐ है? दुकानदार: केले 20 रु. दर्जन और सेव 100 रु. किलो

उसी समय एक गरीब सी औरत दुकान में आयी और बोली मुझे एक किलो सेव और एक दर्जन केले चाहिए, क्या भाव है? भैया दुकानदार: केले 5 रु दर्जन और सेब 25 रु किलो। औरत ने कहा: जल्दी से दे दीजिए। दुकान में पहले से मौजूद ग्राहक ने खा जाने वाली निगाहों से घूरकर दुकानदार को देखा, इससे पहले कि वो कुछ कहता, दुकानदार ने ग्राहक को इशारा करते हुए थोड़ा सा इंतजार करने को कहा। औरत खुशी-खुशी खरीदारी करके दुकान से निकलते हुए बड़बड़ाई हे भगवान! तेरा लाख-लाख शुक्र है, मेरे बच्चे फलों को खाकर बहुत खुश होंगे।

औरत के जाने के बाद, दुकानदार ने पहले से मौजूद ग्राहक की तरफ देखते हुए कहा: ईश्वर गवाह है, भाई साहब मैंने आपको कोई धोखा देने की कोशिश नहीं की। यह विधवा महिला है, जो चार अनाथ बच्चों की मां है। किसी से भी किसी तरह की मदद लेने को तैयार नहीं है। मैंने कई बार कोशिश की है और हर बार नाकामी मिली है। तब मुझे यही तरकीब सूझी है कि जब कभी ये आए तो, मैं उसे कम से कम दाम लगाकर चीज़े दे दूँ। मैं यह चाहता हूँ कि उसका भ्रम बना रहे और उसे लगे कि वह किसी की मोहताज नहीं है।

मैं इस तरह भगवान के बन्दों की पूजा कर लेता हूँ। थोड़ा रूक कर दुकानदार बोला: यह औरत हफ्ते में एक बार आती है। भगवान गवाह है, जिस दिन यह आ जाती है उस दिन मेरी बिक्री बढ़ जाती है और उस दिन परमात्मा मुझ पर मेहरबान हो जाता है।

ग्राहक की आंखों में आंसू आ गए, उसने आगे बढ़कर दुकानदार को गले लगा लिया और बिना किसी शिकायत के अपना सौदा खरीदकर खुशी-खुशी चला गया। खुशी अगर बांटना चाहो तो तरीका भी मिल जाता है।

*सदैव प्रसन्न रहिये।*

*जो प्राप्त है, पर्याप्त है।।*